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DElEd Third Semester Syllabus | Math | English | Hindi | Samaveshi Shiksha | Shaikshik Mulyankan, Kriyatmak Shodh, Navachar|

DElEd Third Semester Syllabus

SCERT के कोर्स डीएलएड या पहले जो बीटीसी के नाम से जाना जाता था, चार सेमेस्टर का कोर्स है | जिसके डीएलएड तृतीय सेमेस्टर के सिलेबस में मुख्या रूप से दो सैद्धांतिक विषय, ‘समावेशी शिक्षा और विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे’ तथा ‘ शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध और नवाचार’ हैं, बाकि जो सभी कॉमन विषय विज्ञान, गणित, हिंदी, सामाजिक विज्ञानं और अंग्रेजी हैं| सबके सिलेबस की चर्चा निचे कर दी गयी है|

शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध एवं नवाचार

कक्षा षिक्षणः विषयवस्तु

1. मापन एवं मूल्यांकन

 शैक्षिक मापन एवं मूल्यांकन की अवधारणा।
 शैक्षिक मापन का अर्थ
 मूल्यांकन की संकल्पना
 मूल्यांकन के उद्देश्य
 मूल्यांकन के क्षेत्र
 मूल्यांकन की आवश्यकता एवं महत्व।
 मूल्यांकन की प्रशासनिक आवश्यकता
 मूल्यांकन की शैक्षिक आवश्यकता
 मूल्यांकन की शैक्षिक अनुसंधान में आवश्यकता
 सामाजिक दृष्टिकोण से मूल्यांकन की आवश्यकता
 मापन एवं मूल्यांकन में अन्तर।
 परीक्षण एवं मापन में अन्तर
 सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन की अवधारणा एवं महत्व।
 दक्षता आधारित मूल्यांकन
 व्यापक मूल्यांकन
 सतत् मूल्यांकन एवं महत्व
 सतत् मूल्यांकन की कार्य-प्रणाली एवं सोपान
 सतत् मूल्यांकन का क्षेत्र।
 सतत् मूल्यांकन की कार्य-प्रणाली एवं सोपान
 मूल्यांकन के पक्ष।

 संज्ञानात्मक
ज्ञान, बोध, अनुप्रयोग या व्यवहारिकता, विश्लेषण, संश्लेषण एवं मूल्यांकन।

 भावात्मक
ग्रहण करना या ध्यान देना, अनुक्रिया करना, मूल्य आंकना, संगठन, मूल्य द्वारा विशिष्टीकरण

 कौशलात्मक

एवं व्यवहारात्मक

सामाजिक कौशल
यान्त्रिक कौशल
गणितीय कौशल
भाषायी कौशल

 उत्तेजना
 क्रियान्वयन
 नियंत्रण।
 समायोजन
 स्वाभावीकरण
 मूल्यांकन के प्रकार- 
मौखिक परीक्षा 
लिखित परीक्षा 
साक्षात्कार/निरीक्षण/अवलोकन/प्रायोगिक 
रचनात्मक मूल्यांकन

आंकलित मूल्यांकन
 उत्तम परीक्षण/मूल्यांकन की विशेषताएं, शिक्षण अधिगम और मूल्यांकन का संबंध।
 प्रश्न-पत्र निर्माण प्रक्रिया 
योजना निर्माण, ब्लूप्रिन्ट, सम्पादन तथा अंक निर्धारण। 
प्रश्नों के प्रकार (वस्तुनिष्ठ, अतिलघुउत्तरीय, लघुत्तरीय, दीर्घउत्तरीय) 
शैक्षिक उद्देश्यों के अनुसार प्रश्नों के पक्ष (ज्ञान, बोध, अनुप्रयोग, कौशल)
 मूल्यांकन अभिलेखीकरण (संज्ञानात्मक तथा संज्ञान सहगामी पक्ष) सतत्, मासिक, अर्द्धवार्षिक एवं वार्षिक मूल्यांकन, पुनर्बलन।
 निदानात्मक परीक्षण एवं उपचारात्मक शिक्षण।
 क्रियात्मक शोध।
 शोध का अर्थ, प्रकार, उद्देश्य, आवश्यकता एवं महत्व।
 क्रियात्मक शोध के क्षेत्र।
 क्रियात्मक शोध के चरण एवं प्रारूप निर्माण।
 क्रियात्मक शोध उपकरण निर्माण।
 क्रियात्मक शोध का सम्पादन/अभिलेखीकरण।
 शैक्षिक नवाचार
 शिक्षा में नवाचार का अर्थ, आवश्यकता एवं महत्व।
 शैक्षिक नवाचार के क्षेत्र (शिक्षण अधिगम के सुधार हेतु स्थानीय समुदाय/परिवेश के संसाधनों की पहचान और उनका उपयोग कर मूल्यांकन, प्रार्थना स्थल की गतिविधि, पाठ्य सहगामी, क्रियाकलाप, सामुदायिक सहभागिता, विद्यालय प्रबंधन, विषयगत कक्षा-शिक्षण समसामयिक दृष्टान्त, लैबएरिया।

समावेशी शिक्षा एवं विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा, निर्देशन एवं परामर्श

कक्षा षिक्षणः विषयवस्तु

1. खण्ड ‘अ‘ – विषिष्ट आवष्यकता वाले बच्चे

 शैक्षिक समावेशन से अभिप्राय, पहचान, प्रकार, निराकरण। यथाः अपवंचित वर्ग, भाषा, धर्म, जाति, क्षेत्र, वर्ण, लिंग, शारीरिक दक्षता (दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित एवं वाक्/अस्थिबाधित), मानसिक दक्षता।
 समावेशन के लिए आवश्यक उपकरण, सामग्री, विधियाँ, टी0एल0एम0 एवं अभिवृत्तियाँ ।
 समावेशित बच्चों का अधिगम जाँचने हेतु आवश्यक टूल्स एवं तकनीकी
 समावेशित बच्चों के लिए विषेष षिक्षण विधियाँ। यथा-ब्रेललिपि आदि।

2. खण्ड ‘ब‘ – निर्देषन एवं परामर्ष

 समावेशी बच्चों हेतु निर्देषन एवं परामर्ष: अर्थ, उद्देष्य, प्रकार, विधियाँ, आवष्यकता एवं क्षेत्र
 परामर्ष में सहयोग देने वाले विभाग/संस्थाएँ
 मनोविज्ञानषाला, उ0प्र0, इलाहाबाद
 मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र (मण्डल स्तर पर )
 जिला चिकित्सालय
 जिला षिक्षा एवं प्रषिक्षण संस्थान में प्रषिक्षत डायट मेण्टर
 पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण तन्त्र
 समुदाय एवं विद्यालय की सहयोगी समितियाँ
 सरकारी एवं गैर सरकारी संगठन
 बाल-अधिगम में निर्देषन एवं परामर्ष का महत्व

विज्ञान DElEd Third Semester Syllabus

कक्षा-शिक्षणः विषयवस्तु

 दैनिक जीवन में विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी (परिवहन, चिकित्सा, जनसंचार, मनोरंजन, उद्योग, कृषि, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, आधुनिक ईंधन, दूरस्थ शिक्षा)। मानव समाज को विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी से लाभ व हानियां।
 दाब तथा वैज्ञानिक यंत्र।
 जीव जन्तुओं के वाह्य एवं आंतरिक अंगों के कार्यों में विविधता।
 सूक्ष्य जीवों की दुनिया-संरचना तथा उपयोगिता, सूक्ष्म जीव-दोस्त या दुश्मन। भोज्य पदार्थों का परिरक्षण।
 प्राकृतिक सम्पदा का संरक्षण एवं ब्रह्माण्ड जीवों का विलुप्तीकरण।
 कार्बन एवं उसके यौगिक।
 असंक्रामक रोग/अनियमित जीवन शैली से उत्पन्न रोग (मधुमेह, उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारियां) कारण, निदान व उपचार।
 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन, जलीय पौधों एवं जानवरों का प्राकृतिक वास, मरूद्भिद पौधों एवं जानवरों का प्राकृतिक वास। पर्यावरण असंतुलन में मानव का हस्तक्षेप, वन्य जीव जन्तुओं का संरक्षण कार्यक्रम, ग्रीन हाउस गैसीय प्रभाव, ओजोन-क्षरण, धरती का बढ़ता तापमान।
 ऊष्मा, प्रकाश एवं ध्वनि:- ऊष्मा का मापन, संचरण व संवहन। प्रकाश: स्रोत एवं संचरण, प्रकाश का परावर्तन व अपवर्तन, गोलीय, अवतल व उत्तल दपर्ण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना। ध्वनि: संचरण, आवृत्ति व आवर्तकाल।

गणित DElEd Third Semester Syllabus

कक्षा-शिक्षणः विषयवस्तु

 संख्या तथा संख्यांक का बोध, अंकों का ज्ञान, स्थानीय मान
 गुणा तथा भाग की संकल्पना एवं संक्रियाएँ।
 भिन्न की संकल्पना तथा गणितीय संक्रियाएँ।
 दशमलव संख्या की अवधारणा, दशमलव संख्या में प्रयुक्त अंकों का स्थानीयमान तथा गणितीय संक्रियाएँ।
 अपवर्तक (विभाजक), अपवत्र्य (गुणज), समापवर्तक तथा समापवत्र्य की अवधारणा।
 लघुतम समापवत्र्य तथा महत्तम समापवर्तक की अवधारणा, भाज्य तथा अभाज्य संख्याओं का अर्थ।
 प्रतिशत का अर्थ तथा संकेत तथा प्रतिशत ज्ञात करना।
 अवर्गीकृत आंकड़ों का पिक्टो-ग्राफ, बार-ग्राफ तथा पाई-ग्राफ द्वारा निरूपण।
 सजातीय तथा विजातीय बीजगणितीय व्यंजकों का बोध, इनका जोड,़ घटाना।
 तल, तलखण्ड, बिन्दु, रेखा, वक्र, रेखाखण्ड, किरण तथा कोण की संकल्पना।
 पटरी तथा परकार की सहायता से 600, 900 तथा 1200 का कोण बनाना।
 कोण के प्रकार (न्यूनकोण, समकोण तथा अधिककोण)
 त्रिभुज, आयत, वर्ग तथा वृत्त की अवधारणा तथा इनके अंगों की जानकारी।
 परिमिति का अर्थ।

सामाजिक अध्ययन DElEd Third Semester Syllabus

कक्षा-शिक्षणः विषयवस्तु

 इतिहास का अर्थ, महत्व एवं जानने के स्रोत, पुरातात्विक मुद्रा एवं अभिलेख, साहित्यिक विवरण, विदेशी यात्रियों का विवरण, तिथि निर्धारण पद्धतियाँ।
 पृथ्वी पर मानव की उत्पत्ति एवं विकास-पाषाण या प्रस्तर काल, ताम्र एवं कांस्य युग, लौह युग।
 नदी घाटी की सभ्यताएं-सिंधु घाटी की सभ्यता, मेसोपोटैमिया की सभ्यता, मिस्र की सभ्यता, चीन की सभ्यता।
 वैदिक काल-पूर्व एवं उत्तर वैदिक काल।
 महाजनपद काल-भारत के प्रारंभिक षोडश महाजनपदों का उल्लेख, मगध का साम्राज्य, सिकंदर का आक्रमण व उसका भारत पर प्रभाव।
 उपनिषद्काल-जैन व बौद्ध धर्म।
 सौरमण्डल-ग्रह, उपग्रह, क्षुद्रग्रह, आकाशगंगा, उल्कापिंड।
 मानचित्र अर्थ एवं दिशाओं का ज्ञान, मानचित्रण।
 अक्षांश एवं देशान्तर रेखाएं-क्या, कितनी और क्यों, ळडज्ए प्ैज्ए प्दजमतदंजपवदंस क्ंजम स्पदमए ज्पउर्म वदमेए च्तपउम डमतपकपंदण्
 पृथ्वी ताप कटिबन्ध, गोलार्ध एवं ध्रुव।
 पृथ्वी की गतियां-परिभ्रमण, परिक्रमण-क्या, क्यों, कैसे एवं इसका परिणाम।
 महाद्वीप, महासागर।
 एशिया महाद्वीप में भारत-स्थिति एवं विस्तार, पड़ोसी देश, धरातल, जलवायु, वनस्पति एवं वन्यजीव।
 खगोलीय संगठन- आदि।
 ग्रामीण एवं नगरीय जीवन शैली।
 ग्रामीण जीवन-पंचायती राज व्यवस्था-ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत का गठन एवं मुख्य कार्य।
 नगरीय जीवन-नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद, नगर निगम का गठन एवं मुख्य कार्य
 जनपद स्तरीय प्रशासन-कानून व्यवस्था, भूमि व्यवस्था, नागरिक सुविधाओं का विकास-शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था।
 यातायात एवं सुरक्षा
 सड़क यातायात के नियमों एवं संकेतों की जानकारी।
 सड़क दुर्घटना के बचाव हेतु सावधानियां।
 रेल यातायात-रेलवे क्रासिंग के संकेतों की जानकारी।
 रेलयात्रा करते समय सावधानियां।
 यातायात संकेतों की जानकारी।
 अर्थशास्त्र एक परिचय-अर्थशास्त्र का अभ्युदय, विभिन्न अर्थशास्त्रियों के दृष्टिकोण में अर्थशास्त्र, प्रसिद्ध अर्थशास्त्रियों का अर्थशास्त्र में योगदान-एडम स्मिथ, एल्फ्रेड, मार्शल राॅबिन्स, जे0के0 मेहता, अमत्र्य सेन आदि।
 राष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय, सकल घरेलू उत्पाद ,, शुद्ध घरेलू उत्पाद ,, सकल राष्ट्रीय उत्पाद ,, शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद ,, वैयक्तिक आय ,, व्यय योग्य आय ,, राष्ट्रीय आय व आर्थिक विकास।

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